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GST क्या है ? और GST क्यों जरुरी है ?

जीएसटी क्या है आज दोस्तों मैं आपको इस पोस्ट में जीएसटी के बारे में बताऊंगा इसको माल ( गुड्स) और सेवा (सर्विस) टैक्स के नाम से जाना जाता है यह भारत का एक इनडायरेक्ट टैक्स है जिसको काफी सारे इन डायरेक्ट टैक्सों से बदला गया है जैसे एक्साइज ड्यूटी,वैट टैक्स , सर्विस टैक्स ,सेल टैक्स, स्टेट सेल टैक्स तो आज गुड्स एंड सर्विस टैक्स है।

GST की जरूरत क्यों पड़ी उसके बारे में हम आज बात करेंगे इसकी जरूरत इसलिए पड़ी क्यूंकि हमारे पूरे भारत में एक टेक्स स्लैब लाने के लिए क्योंकि अलग-अलग स्टेट का अलग अलग सेल टैक्स और अलग-अलग एंट्री टैक्स था ,अलग-अलग लग्जरी टैक्स और अलग-अलग खरीद टैक्स थे उन सब को हटाने के लिए आप एक उदाहरण से समझो इसको , किसी सामान की कीमत राजस्थान में क ₹10 होती थी तो साउथ में जम्मू में या किसी भी दूसरे स्टेट में उसकी कीमत थी वह कहीं अधिक होती थी या कहीं कम होती थी जिससे ट्रेडर्स को और कस्टमर के बीच मतभेद बढ़ जाता था और इससे कालाबाजारी होती और टैक्स की चोरी भी होती। भारत सरकार को पुरे भारत में गुड्स एंड सर्विस टैक्स लाना पड़ा। अब पुरे भारत में सभी सामान की कीमत एक ही होती है आप चाहे कही से भी खरीदो।

GST की शुरुआत कब हुई?

जीएसटी को सन 2000 में तत्कालीन प्रधानमंत्री बिहारी वाजपेयी जी के द्वारा लाया गया था और उसके ऊपर 2004 में एक टास्क फोर्स का गठन किया गया था और 2006 में तत्कालीन वित्त मंत्री ने जीएसटी के प्रपोजल को बजट में पेश किया था उसके बाद 2010 में इसको वापस लाया गया लेकिन उसको इंप्लीमेंट के लिए वापस भेजना पड़ा और 2012 में एक स्टैंडिंग कमेटी का गठन किया गया जीएसटी के ऊपर 2013 में उस स्टैंडिंग कमेटी ने जीएसटी की रिपोर्ट को टेबल किया 2014 में तत्कालीन वित्त ने जीएसटी को फिर से इंट्रोड्यूस किया और 2015 में जीएसटी बिल को लोकसभा में पास किया गया लेकिन राज्यसभा में पास नहीं किया गयाऔर वापस अमेंडमेंट के लिए भेजा गया , 2016 में जी एस टी में बदलाव करके फिर से संसद में पेश किया गया जिसको लोकसभा और राज्य सभा ने पास करके राष्ट्रपति के पास भेज दिया। और 1 जुलाई 2017 से ही जीएसटी को लागू किया गया।

जी एस टी के प्रकार

जी एस टी के हिस्से

CGST = यह टैक्स केंद्र सरकार द्वारा वसूला जाता है यह हर राज्य से वसूला जाता है।

SGST = यह टैक्स राज्य सरकार द्वारा वसूला जाता है

IGST = यह टैक्स केंद्र सरकार द्वारा वसूला जाता है।

जी एस टी रजिस्ट्रेशन ( INDIVISUAL ) :- जी एस टी का रेगुलर स्कीम और कम्पोजीशन स्कीम के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन के लिए वो आते है जिनका वार्षिक टर्न ओवर 1.5 करोड़ होता है। यदि टर्न ओवर 1.5 करोड़ से कम है तो नार्मल स्कीम के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन होता है। रेगुलर स्कीम के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन वालो को GST रिटर्न फिलिंग हर माह GSTR -3B और तिमाही GSTR -4 भरना होता है

जी इस टी रेजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी कागजात

  • पैन कार्ड
  • आधार कार्ड
  • ट्रेड नाम ( उत्पादन और सेवा का ब्यौरा )
  • लीज एग्रीमेंट (यदि किराये पर ऑफिस या दुकान है तो )
  • NOC ( जिस से दुकान या ऑफिस किराये पर ली है )
  • लाइट बिल
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • मोबाइल नंबर
  • E Mail ID
  • प्रॉपर्टी के कागज लाइट बिल के साथ (यदि खुद की दुकान या ऑफिस है तो )

COMPOSITE SCHEME और REGULAR SCHEME में क्या अंतर् है ?

कम्पोजिट स्कीम रेगुलर स्कीम
तिमाही रिटर्न भरा जाता है हर महीने रिटर्न भरा जाता है
रिटर्न फाइलिंग का तकनीकी नाम – CMP08 रिटर्न फाइलिंग का तकनीकी नाम- GSTR 3B
रिटर्न फाइलिंग की आखिरी तारीख – हर तीसरे माह की 18 तारीख रिटर्न फाइलिंग की आखिरी तारीख – हर माह की 20 तारीख
इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC ) का फायदा नहीं मिलेगा इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC ) का फायदा मिलेगा
आप ऑनलाइन बिज़नेस नहीं कर सकते है आप ऑनलाइन बिज़नेस कर सकते है।
आप केवल एक ही राज्य में बिज़नेस ट्रांसेक्शन कर सकते है आप अंतर्राज्यीय बिज़नेस ट्रांसेक्शन कर सकते है। मतलब आप किसी दूसरे राज्य में भी सामान बेच सकेंगे या भेज सकेंगे

GSTR रिटर्न फाइलिंग के प्रकार

  • GSTR -1
  • GSTR -3B
  • GSTR -5
  • GSTR -6
  • GSTR -8
  • GSTR -9
  • GSTR -10
  • CMP-08

GSTR -1 : GSTR -1 को महीने में एक बार या तिमाही भरना हर रजिस्टर्ड डीलर के लिए जरूरी है। इस रिटर्न के कुल 13 सेक्शन भरे जाते है। जिनका सालाना टर्न ओवर 1.5 करोड़ से जयादा हो तो आपको हर महीने भरना होता है। यदि आपका सालाना टर्न ओवर 1.5 करोड़ से कम है तो तिमाही भर सकते है।

GSTR -3B : यह रिटर्न GSTR -3B सरकार द्वारा बहुत ही साधारण बनाया है। यह हर GST धारक को हर महीने भरना अनिवार्य है। इसके लिए इनवॉइस लेवल की जानकारी भरने की जरूरत नहीं है। इसमें कुल वैल्यू भरनी होती है। इसको भरने की आखिरी तारीख हर महीने की २० तारीख होती है।

GSTR -5 : GSTR -5 यह फॉर्म विदेशी टैक्स पेयर के लिए है जो भारत में बिज़नेस करते है। ये उस टाइम अंतराल का ही टैक्स भरते है जब वो भारत में बिज़नेस करते है।

GSTR -6 : GSTR -6 यह फॉर्म इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर द्वारा भरा जाता है इसमें ITC की डिस्ट्रीब्यूशन डिटेल्स भरी जाती है। इस फॉर्म में 11 सेक्शन भरे जाते है।

GSTR -8 : GSTR -8 यह फॉर्म E COMMERCE ओपेरटर द्वारा भरा जाता है। जो टीडीएस काटते है और इस फॉर्म में उसकी डिटेल्स भरते है। ये सभी E COMMERCE प्रोवाइडर भरते है।

GSTR -9 : GSTR -9 इस फॉर्म को प्रत्येक GST होल्डर को साल में एक बार भरना अनिवार्य होता है। इसमें पुरे साल का टर्न ओवर (CGST + SGST +IGST ) की सारी डिटेल्स और ऑडिट डिटेल्स भरी जाती है।

GSTR -10 : GSTR -10 फाइनल रिटर्न इस फॉर्म को जी एस टी रजिस्ट्रेशन को कैंसिल करने या सरेंडर करने के लिए भरा जाता है

CMP -08 : CMP -08 इस फॉर्म को कम्पोजिट स्कीम वाले डीलर भरते है यह फॉर्म तिमाही भरा जाता है। यह हर तीसरे माह की 18 तारीख से पहले भरा जाता है।

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